ये कहानी है इशिता और अभय रायजादा की। शादी के 2 साल बाद भी इशिता को अभय ना पत्नी होने का हक़ दे सका और ना उसे इज़्ज़त लेकिन फिर भी इशिता ने इस रिश्ते को निभाया। अभय तनीषा से प्यार करता था और उसी के साथ रहना चाहता था। फिर भी इशिता ने इस रिश्ते को निभाया, इशिता के बेपनाह मोहब्बत के बाद भी वह दोनों अलग हो गए। और ज़िन्दगी के सफऱ के इशिता खड़ी रह जाती है अकेली। क्या इशिता क़ो मिले गी उसकी मोहब्बत? क्या अभय और इशिता की कहानी की यही अंत है?