इस किताब में इस कहानी से सुनिये योद्धा नाम की है जो किताब है इसमें हमारे पुराने जितने भी योद्धा हैं उनके बारे में जिन्होंने अपनी जान की कुर्बानी देकर भी मातृ मिट्टी की रक्षा की अनहोंन ये नहीं सोचा कि हम मर जाएंगे तो हम क्यों लड़े और ऐसे योद्धा हैं जिनकी धड़क से गर्दन अलग कर दी और उन्हें मरने के लिए पीछे से युद्ध किया था लेकिन जिसने युद्ध किया था उसे झड़ने बिना गर्दन के मारा और मुंह ने गली दी