मेरे दिल की किताब का
हर पन्ना तुम्हारे नाम से शुरू होता है।
जब भी उसे खोलती हूँ,
हर लफ़्ज़ बस तुम्हारी ही बात करता है।
तुम मिले तो लगा
जैसे अधूरी दुआ को मंज़िल मिल गई।
सूनी-सी इस ज़िंदगी को
मोहब्बत की एक ख़ूबसूरत मंज़िल मिल गई।
मैंने अपने जज़्बातों को
हर पन्ने में बड़ी शिद्दत से सजाया है,
तुम बस एक बार पढ़कर देखना,
मैंने हर अल्फ़ाज़ में सिर्फ़ तुम्हें ही बसाया है।
अगर कभी मेरी कहानी का
आख़िरी सफ़ा भी लिखना पड़े,
तो बस इतना लिख देना— "एक लड़की थी, जिसने पूरी शिद्दत से सिर्फ़ एक ही शख़्स से मोहब्बत की थी।"