रिज़वान अंसारी और हानिया हुसैन की यह दास्तान महज़ एक कहानी नहीं, बल्कि रूह को झकझोर देने वाला एक ऐसा दरिया है जिसमें नफ़रत की आग भी है और इश्क़ का इत्मीनान भी। दुनिया को जीतने वाला शख़्स जब एक पिता के आगे घुटने टेक देता है, तो वह हार भी मुक़द्दर बन जाती है।