खुद से मुलाकात 🥀
आज आईने के सामने बैठी,
तो पहली बार खुद से नज़रें मिलीं।
चेहरे पर मुस्कान तो थी,
पर आँखों में कई अनकही बातें छिपी मिलीं।
मैंने खुद से पूछा—
"कैसी हो?"
दिल ने धीरे से कहा—
"सबको संभालते-संभालते,
खुद को भूल गई हूँ।"
हर रिश्ते को निभाते-निभाते,
अपनी ही चाहत कहीं खो गई।
दूसरों की खुशियों में मुस्कुराती रही,
पर अपनी मुस्कान जाने कहाँ सो गई।
कभी आईने से शिकायत की,
कभी किस्मत से सवाल किए।
फिर एहसास हुआ,
सबसे ज़्यादा जख्म तो
मैंने खुद को ही दिए।
आज मैंने अपने आँसू पोंछे,
और खुद का हाथ थाम लिया।
जो सपना अधूरा रह गया था,
उसे फिर से जीने का नाम दिया।
अब किसी की तारीफ़ की मोहताज नहीं,
मैं खुद अपनी पहचान बनूँगी।
टूटकर भी हर बार,
नई सुबह की तरह सँवरूँगी।
मैं फूल भी हूँ,
मैं खुशबू भी हूँ।
मैं बारिश भी हूँ,
मैं इंद्रधनुष भी हूँ।
मेरी खामोशी मेरी कमजोरी नहीं,
मेरे सब्र की कहानी है।
जो मुस्कान मेरे होंठों पर रहती है,
वह मेरी सबसे बड़ी निशानी है।
अब खुद से वादा किया है,
कभी खुद को अकेला नहीं छोड़ूँगी।
जो प्यार दुनिया से चाहा था,
वह पहले खुद को दूँगी।
अब आईना मुझे डराता नहीं,
वह मेरा सबसे सच्चा साथी है।
हर रोज़ कहता है—
"तुम जैसी हो, बिल्कुल खूबसूरत हो…
क्योंकि तुम्हारी सबसे बड़ी खूबसूरती, तुम्हारा आत्मविश्वास है।"
आज की यह खुद से मुलाकात,
मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन पल बन गई।
अब मैं किसी और जैसी नहीं बनना चाहती,
क्योंकि मुझे मेरी अपनी पहचान मिल गई।
अब हर सुबह मैं मुस्कुराकर उठती हूँ,
हर शाम खुद का शुक्रिया करती हूँ।
क्योंकि मैंने समझ लिया है—
दुनिया की सबसे खूबसूरत मोहब्बत,
वो है जो एक लड़की खुद से करना सीख जाती है। 🌸🥀
लेखक = श्वेता अग्रवाल ✍️❤️🥀