" कहते है शिव को पाने के लिए सती ने एक लंबा अरसा इंतेजार करना पड़ा था | लेकिन अंत में सती ने अपनी कविता के साथ कड़ी तपस्या के साथ अपने गंगा जैसे पवित्र प्रेम अपने शिव को पा ही लिया था "
कुछ ऐसे ही कहानी हमारी आस्था और अभ्यांश की | अभ्यांश सिंघानिया द वेपन किंग नंबर 1 बिजनेस टायकून बिजनेस टेक्नोलॉजी के इंडस्ट्री में राज करने वाला बेहद गुस्सेल और बेदर्दी इंसान जिसे किसी के दर्द से जरा सा भी फर्क नहीं पड़ता था आज उसकी जिंदगी में एक लड़की इतनी जरुरी हो चुकी थी की उसे सही और गलत का फर्क दिखाई नही दे रहा था |
आस्था वर्मा जिसके हाथ खून से रंगे हुए हैं जो पिछले 1 सालों से किसी जिंदा लाश की तरह बेड पर पड़ी हुई है द वेपन की अभ्यांश सिंघानिया आस्था वर्मा के पीछे उसके प्यार में पागल है
और वो आस्था वर्मा को पाने के लिए हर हद से गुजर चूका है अब वो उस की मुहब्बत उस का जुनून बन चुकी है उस की वजह से वो दूर हो चुका है अपनी परिवार से वही उसके परिवार वाले वाकिफ है आस्था की सच्चाई से जिसकी वजह से सभी करते हैं आस्था से बेपनाह नफरत क्या सभी की नफरतों को सहते हुए आस्था बन पाएगी अभ्यांश के परिवार वालों के दिल में जगह क्या अभ्यांश ठीक कर पाएगा आस्था को क्यों ? आस्था पिछले 1 साल से कोमा में है क्या सच आस्था ने किया था किसी का खून ? किसके खून से रंगे है आस्था के हाथ ? कौन है वो सख्स ? क्या आस्था निकल पाएगी अपनी इस जहरीले अतीत से ? जानने के लिए पढ़ते रहिए " Toxic Nightmare" सिर्फ " Lafjo ki kahani " पर