शेर चौरसिया—जो इंसान नहीं, आग है… जिससे पूरा बनारस कांपता है, जिससे टकराने की गलती कोई नहीं करता। और दूसरी तरफ नर्म दिल केशर—जो अपने अतीत की जंजीरों में बंधी हुई है। एक हादसे में… केशर उठा देती है हाथ, और जड़ देती है शेर को एक थप्पड़। अब क्या होगा जब आग और मासूमियत आमने-सामने आएंगे? जानने के लिए सुनते रहिए हमारी कहानी "इश्क की आग"