अमर प्रेम....
Added Successfully to library!
अमर प्रेम....
प्यार
कविता
जो समय की धूल से धुंधला न हो, जो दूरियों के डर से कभी कम न हो, वह प्रीत नहीं जो आज जगे और कल सो जाए, अमर प्रेम तो वो है, जो रूह में समा जाए।
: (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
Add To Library
3
Views
5
Ratings
4 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप