अमर प्रेम....

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अमर प्रेम....


जो समय की धूल से धुंधला न हो, जो दूरियों के डर से कभी कम न हो, वह प्रीत नहीं जो आज जगे और कल सो जाए, अमर प्रेम तो वो है, जो रूह में समा जाए।

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