चोटी पर पहुंचने की यात्रा
चोटी तक पहुँचने की यात्रा आसान नहीं थी।
हर मोड़ पर संघर्ष, थकान और टूटने का डर था।
लेकिन जब मैं आखिरकार चोटी पर पहुँचा,
तो समझ आया कि असली जीत दुनिया को देखने में नहीं,
खुद को पहचानने में थी।
यह डायरी उसी सफर की कहानी है —
जहाँ पहाड़ बाहर कम, भीतर ज़्यादा थे।