मैंया ऐसो जिया में समाय गयीं रे
कि मैं तनमन की सुध बुध गंवा बैठी।
हर आहट पे समझी लो आय गयीं रे
झट पूजा की थाली सजा बैठी ।
मैंया के शीश पर लाल चुनरी सजे
चुनरी की छवि लागे प्यारी-2
मैया के मांग में मांग टीका सजे
टीके की chamak लगे प्यारी-2
देख चुनरी और टीका लजाय गयी रे
झट थाली में दीपक सजा बैठी।
मैंया के हाथ में स्वर्ण कंगन सजे
कंगन की खनक लागे न्यारी-2
मैंया के पाँव में चाँदी पायल सजे
पायल की छमक लागे न्यारी-2
देख कंगन और पायल बौराय गयी रे
झट थाली में चंदन सजा बैठी ।
मैंया शेरो चढ़ी बड़ी लागे भली
मैंया की ये छवि लागे प्यारी -2
उनके चरणों में मैं ध्यान अपने धरूं
मैया पे जाऊं मैं वारी वारी-2
पाके उनकी कृपा पार पाय गयी रे
कि मैं दुनिया की चिंता भुला बैठी ।
मैया …………………….