इश्क या इंतकाम - Shadows of Deceit

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इश्क या इंतकाम - Shadows of Deceit


भाग १: पहली मुलाक़ात, तीखी तकरार मुंबई… वो शहर जो कभी सोता नहीं। जहाँ हर सड़क पर भागती ज़िंदगी और हर चेहरे के पीछे एक नई कहानी छिपी होती है। सुबह के आठ बजे थे। बारिश के बाद की ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी और पूरे घर में अदरक वाली चाय की खुशबू फैली हुई थी। “अवनि…! उठ जा बेटा, ऑफिस नहीं जाना क्या?” रसोई से सुधा जी की आवाज़ गूँजी। बेड पर उल्टी पड़ी अवनि ने तकिया कान पर रख लिया। “मम्मी… पाँच मिनट…” “ये पाँच मिनट बोलते-बोलते तेरी उम्र पच्चीस की हो गई है!” अवनि हँसते हुए उठ बैठी। बिखरे बाल, हाथ में मोबाइल और चेहरे पर वही बेफिक्र मुस्कान। “अरे मम्मी, शादी करवाने की इतनी जल्दी क्यों है आपको? पहले देश की राजनीति सुधार लूँ, फिर अपनी लाइफ देखूँगी।” सुधा जी ने आँखें तरेरीं। “पत्रकार क्या बनी है, खुद को प्रधानमंत्री समझने लगी है!” तभी छोटा भाई आरव हँसते हुए बोला— “दीदी को कोई लड़का पसंद ही नहीं आएगा। इनके सपनों का राजकुमार भी इंटरव्यू देकर ही पास होगा।” अवनि ने कुशन उठाकर उसकी तरफ फेंका। “और तेरी रिपोर्ट कार्ड वाली सच्चाई मम्मी को बताऊँ क्या?” घर में हँसी गूँज उठी अवनि का परिवार छोटा जरूर था, लेकिन उसमें अपनापन भरपूर था। पिता के जाने के बाद अवनि ने बहुत कम उम्र में जिम्मेदारियाँ संभाल ली थीं। बाहर से वह जितनी बिंदास दिखती थी, अंदर से उतनी ही मजबूत थी। कुछ ही देर बाद अवनि तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गई। मुंबई की सड़कें हमेशा की तरह ट्रैफिक से भरी थीं। ऑटो में बैठी अवनि अपने लैपटॉप पर किसी फाइल में व्यस्त थी। तभी उसके फोन पर कॉल आया। “हाँ कबीर?” “मैडम, बॉस आपको ढूँढ रहे हैं। जल्दी ऑफिस पहुँचो।” “क्या हुआ?” “कोई बड़ा केस है शायद।” अवनि की आँखों में चमक आ गई। उसे ऐसे ही केस पसंद थे—रहस्य, राजनीति और बड़े लोगों के छिपे चेहरे। कुछ देर बाद वह ‘द क्रॉनिकल’ के ऑफिस पहुँची। ऑफिस में हमेशा की तरह अफरा-तफरी मची हुई थी। कोई न्यूज़ एडिट कर रहा था, कोई कैमरा सेट कर रहा था। अवनि जैसे ही अपने केबिन की तरफ बढ़ी, सामने से तेज़ी में आता एक आदमी उससे टकरा गया। उसके हाथ की कॉफी सीधे अवनि की सफेद शर्ट पर गिर गई। “व्हाट द हेल!” अवनि चीखी। सामने खड़ा आदमी लगभग छह फीट लंबा, ब्लैक शर्ट और ग्रे कोट में बेहद रौबदार लग रहा था। उसकी आँखों में अजीब सा ठंडापन था। उसने बिना घबराए अवनि को देखा। “आप सामने देखकर नहीं चल सकतीं?” अवनि का मुँह खुला रह गया। “Excuse me? गलती आपकी है और attitude मुझे दिखा रहे हैं?” उस आदमी ने हल्की मुस्कान दी। “अगर आप मोबाइल और दुनिया दोनों साथ संभाल लें, तो शायद ऐसी दुर्घटनाएँ कम हों।” “वाह! ऊपर से ज्ञान भी?” आसपास खड़े लोग चुपचाप तमाशा देखने लगे। अवनि गुस्से में बोली— “मिस्टर, आप हैं कौन?” “विवान राय।” बस इतना कहकर वह आगे बढ़ गया। लेकिन उसका नाम सुनते ही ऑफिस में फुसफुसाहट शुरू हो गई। “यही हैं वो?” “राय ग्रुप वाले?” “इतनी कम उम्र में बिजनेस टायकून…” अवनि ने भौंहें सिकोड़ लीं। “जो भी हो… बदतमीज इंसान है।” तभी कबीर उसके पास आया। “तू जानती भी है वो कौन है?” “मुझे फर्क नहीं पड़ता।” “अरे, विवान राय! इंडिया के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक। हमारा मीडिया हाउस उनके नए प्रोजेक्ट पर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू करने वाला है।” अवनि ने कॉफी के दाग देखते हुए कहा— “तो क्या हुआ? भगवान थोड़ी है।” कुछ देर बाद बॉस ने अवनि को अपने केबिन में बुलाया। “अवनि, ये केस तुम संभालोगी।” “कौन सा?” उन्होंने एक फाइल उसकी तरफ बढ़ाई। फाइल पर लिखा था— “राय ग्रुप — सीक्रेट डील्स” अवनि की आँखें सिकुड़ गईं। “विवान राय?” “हाँ। खबर है कि उनकी कंपनी कुछ गैरकानूनी डील्स में शामिल है। लेकिन सबूत चाहिए।” अवनि के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। “Interesting…” “लेकिन संभलकर। राय परिवार बहुत ताकतवर है।” अवनि ने आत्मविश्वास से कहा— “सर, सच कितना भी ताकतवर क्यों न हो, छिपता नहीं।” शाम को ऑफिस से निकलते समय बारिश शुरू हो चुकी थी। अवनि भीगते हुए सड़क पार कर रही थी कि तभी एक काली कार उसके सामने आकर रुकी। कार का शीशा नीचे हुआ। अंदर वही आदमी बैठा था—विवान राय। “बैठ जाइए। बारिश बहुत तेज़ है।” अवनि ने तुरंत मना किया। “Thanks, लेकिन मैं अजनबियों से लिफ्ट नहीं लेती।” विवान ने उसकी तरफ देखते हुए कहा— “सुबह तो आप मुझे बदतमीज कह रही थीं, अब अजनबी?” अवनि ने होंठ भींच लिए। “देखिए, मुझे बहस करने का शौक नहीं है।” “मुझे भी नहीं। लेकिन आपकी आदत है शायद।” “और आपको लोगों को नीचा दिखाने की।” कुछ पल दोनों एक-दूसरे को घूरते रहे। बारिश लगातार तेज़ होती जा रही थी। विवान अचानक कार से उतरा और उसकी तरफ छतरी बढ़ा दी। “कम से कम इसे ले लीजिए। वरना बीमार पड़ जाएँगी।” उसकी आवाज़ में पहली बार थोड़ी नरमी थी। अवनि कुछ पल के लिए चुप रह गई। फिर बिना कुछ कहे छतरी लेकर आगे बढ़ गई। विवान उसे जाता हुआ देखता रहा। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी… जैसे वह अवनि को पहली बार नहीं देख रहा हो। और दूसरी तरफ… अवनि के मन में भी बार-बार वही चेहरा घूम रहा था। लेकिन उसे नहीं पता था— ये मुलाक़ात सिर्फ एक शुरुआत थी। एक ऐसी कहानी की शुरुआत… जहाँ इश्क भी होगा, और इंतकाम भी।

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