नदामत

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नदामत


पहली झलक फजर का वक्त था सुबह की रौशनी अभी जमीं को छु भी न सकी थी नमाज़ी नमाज़ पढ़ रहे थें ऐसे में एक जवां लड़की सलीके से दुपट्टा बांधे मुसल्ले पर बैठी बेतहाशा रो रही थी उसकी हिचकियां बढ़ती जा रही ...
: Shagufta

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