कुछ ख्वाहिशें अधूरी ही अच्छी लगती हैं,
जैसे बारिश में भीगी कोई पुरानी याद।
ना पूरी होने की जल्दी,ना खो जाने का डर,
बस दिल के किसी कोने में
धीरे-धीरे मुस्कुराती रहती हैं।
एक ख्वाहिश थी कि कोई मुझे भी,
मेरी खामोशी से समझ ले।
बिना कहे पढ़ ले आंखों की कहानी,
और थाम ले हाथ जब दुनिया छोड़ दे साथ।
एक ख्वाहिश ये भी थी कि जिंदगी थोड़ी आसान हो जाए,
माँ की दुआएं कभी कम न हों,
और अपनों के चेहरे पर हर दिन मुस्कान रहे।
पर वक्त ने सिखाया हर ख्वाहिश पूरी नहीं होती,
कुछ अधूरी दुआएं ही
इंसान को जीना सिखाती हैं।
अब बस इतनी सी ख्वाहिश है
जहाँ भी रहूँ,
दिल में मोहब्बत बनी रहे,और मेरी वजह से
किसी की आँखों में
कभी आँसू न आएँ