हौसलों की उड़ान..
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हौसलों की उड़ान..
कविता
कविता
यूं ही नहीं मिलती मंजिलें, एक जुनून सा दिल में जगाना होता है, पूछा जब चिड़िया से कि कैसे बना आशियाना? बोली— "भरनी पड़ती है उड़ान बार-बार, तिनका-तिनका उठाना होता है।"
लेखक : (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
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