इश्क़ की डोर

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इश्क़ की डोर


दो अजनबी, एक इत्तेफ़ाक़ और एक ऐसा रिश्ता, जो बिना किसी नाम के भी गहरा हो गया। राजवीर, गुस्से में ढला हुआ, जज़्बातों से दूर भागता हुआ। वहीं इशानी, जिसकी मुस्कान में छुपा हुआ प्यार, हर दर्द को भुला देने वाला। दोनों के बीच एक कांच की दीवार खड़ी थी, दर्द की, कुछ गहरी यादों की। पर उनके दिल… एक ही डोर से बंधते गए, हर मुलाक़ात, हर खामोशी के साथ और करीब आते चले गए। ये कहानी है, उन दो लोगों की। जो एक-दूसरे के पास होकर भी दूर रहे, और दूर रहकर भी अपने इश्क़ के करीब हो गए।

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