हमसफ़र उम्र भर जो साथ निभाए
हमसफ़र
एक छोटा सा गांव जिसका नाम जगदीशपुर था । गांव के एक बड़े से घर के सामने कुछ लोग बैठे बात कर रहे थे। कुछ देर बाद घर के मालिक जिनका नाम सूर्यकान्त पंडित था उठकर घर के अंदर आएं। उनके अंदर आते ही हॉल में बैठी दो लड़किया डर से उठकर अंदर कमरे की तरफ चली गई।
सूर्यकांत पंडित उन लड़कियो कों देख जोर से आवाज लगाते हैं " लक्ष्मी बहू बाहर आओ...।
उनका आवाज सुनकर अंदर कमरे से एक औरत बाहर आई जिसकी उम्र पैंतालीस साल के आसपास था। ये सूर्यकान्त पंडित की छोटे भाई की पत्नी लक्ष्मी थी। लक्ष्मी एक विधवा थी इनके पति का देहांत शादी के पांच साल बाद ही हो गया था। लक्ष्मी जी की दो बेटियां थीं पति के मौत के मौत के बच्चों की जिम्मेदारी उनके जेठ सूर्यकांत पंडित ने अपने उपर ले लिया था।
लक्ष्मी जी घूंघट डाले आकर सूर्यकांत पंडित के सामने खड़ी हो गई। उन्हें देखकर वो तेज आवाज में बोलें " लक्ष्मी बहु कल अनुराधा को देखने लड़के वाले आ रहें हैं तो तुम सारी तैयारी देख लेना। मुझे शिकायत का कोई मौका नहीं चाहिए वरना तुम्हें तो पता है मेरे नज़र में गलती का कोई माफ़ी नहीं है।
लक्ष्मी जी सिर्फ सर झुकाए उनकी बात सुन रही थी वहीं सूर्यकांत पंडित अपना बात कहकर बाहर चले गए। इधर कमरे में गई दोनों लड़कियां सूर्यकांत पंडित की बात सुनकर टेंशन में आ गई थी। लक्ष्मी जी अंदर आतीं हैं तो दोनों लड़कियां आकर उनके गले से लिपट गई।
" मां मुझे अभी शादी नहीं करना...., उसमें से एक लड़की जो कि अनुराधा थी ने कहा। अनुराधा जो लक्ष्मी जी की बड़ी बेटी थी जिसका उम्र उन्नीस साल के आस पास था। जो बहुत ही गोरी लम्बी थी उसकी आंखें नीली थी जिसमें सागर सी गहराई था एक बार कोई भी उसकी आंखों में देखता तो उसमें खो जाता था।
अनुराधा को घर में सभी प्यार से अनु कहकर बुलाते थे । उसने अभी अपना कालेज का पढ़ाई खत्म किया था। सूर्यकांत पंडित बहुत ही कड़क दिमाग के थे वो लड़कियों के ज्यादा पढ़ाई लिखाई के खिलाफ थे। अनुराधा ने बहुत मिन्नतें किया तो उन्होंने उसका नाम प्राइवेट कालेज में लिखवा दिया। अनुराधा ने घर से रहकर पढ़ाई किया और काफी अच्छे नंबर से पास हुईं थीं।
अनु की बात सुनकर लक्ष्मी जी की आंखों में आसूं आ गये वो रोते हुए अनु को गले लगा लेती है और कहती है " अनु सब जानते हुए भी तुम ये बोल रही हो...!
" मां अनु दी ठीक तो कह रही है अभी उम्र ही क्या है इनका जो ताऊजी शादी की बात कर रहे हैं...., लक्ष्मी जी की बात सुनकर उनकी छोटी बेटी आन्या ने कहा। आन्या अनु से चार साल छोटी थी पर वो अनु की तरह शांत नहीं बल्कि काफी तेज तर्रार थी।
लक्ष्मी जी उसे डांटते हुए बोली " तुम्हें धीरे बोलने नहीं आता क्या... अभी तुम्हारी ताईं जी ने तुम्हारी बात सुन लेंगी तो फिर क्या होगा पता है ना...!.
" सुनने दो ताई जी को वो तो वैसे ही हम सबको सुनाने का मौका ढूंढती रहती हैं... मुझे अब उनके बातों से फर्क नहीं पड़ता इसलिए आप मुझे बोलने दो..., आन्या ने चिढ़ते हुए कहा।।
लक्ष्मी जी आन्या की तरफ गुस्से से बढ़ी तो अनु उनके बीच में आ गई और उन्हें रोकते हुए कहा " मां आन्या को कुछ मत कहिए मैं इसे समझा दूंगी। उसकी बात सुनकर लक्ष्मी जी रुक जाती है और रोते हुए कहती है " अनु आन्या को समझा दो कि वो ऐसा कुछ न बोले जिससे मुझे जीजी से चार बात सुनना पड़े।
आन्या ये सुनकर कुछ बोलने को हुई पर वो कुछ कहती उससे पहले अनु ने उसे चुप रहने का इशारा कर दिया जिसे देख वो मन मारकर चुप रह गई।
उसे चुप देखकर अनु ने अपनी मां का हाथ पकड़ा और उसे अपने माथे पर लगाते हुए बोली " मां आप ताऊजी से कहों न कि वो मेरी शादी न करवाएं अभी.... मुझे अभी पढ़ना हैं अगर शादी हो गई तो मैं पढ़ नहीं पाऊंगी ...!
लक्ष्मी जी अनु के इस बात का कोई जबाब देती उससे पहले एक औरत कमरे में आईं और अनु के सामने हाथ नचाते हुए बोली " बड़ी आईं डिग्री लेने वाली.... जितना भैरव के बाबा ने पढ़ा दिया उतना काफी है। अब चुपचाप से शादी करो और यहां से दफा हो ताकि मेरे सर से एक बला टल जाए...।
ये औरत थी सूर्यकांत पंडित की पत्नी सुनंदा जो कि घर की मालकिन थी। लक्ष्मी जी और उनके बच्चे उन्हें फूटी आंख नहीं सुहाते थे पर सूर्यकांत की वजह से वो उन्हें घर में बर्दाश्त करती थी। उन्होंने लक्ष्मी जी को हमेशा एक नौकर की तरह समझा उन्हें बात बात पर ताने सुनाना उनकी आदत थी। अनु उनके सामने कुछ नहीं बोलतीं थी पर आन्या से ये सब बर्दाश्त नहीं होता और वो हमेशा उन्हें सुना देती थी जिसे लेकर बेचारी को कितनी बार लक्ष्मी जी के गुस्से को भी झेलना पड़ा था।
आन्या सुनंदा जी की बात सुनकर चीढ़ गई थी वो गुस्से से आगे बढ़ी और बोली " ताई जी आप देखना मेरी अनु दी डिग्री लेंगी फिर वो चाहे जैसे भी लें ...।
सुगंधा देबी ये सुनते ही आग बबूला हो गई वो आन्या को गुस्से से देखती है और आगे बढ़कर उसके गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ देती है।।
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जारी हैं.....
चलिए हम चलते हैं आपकों लेकर एक नई दुनिया में जहां आपको प्यार परिवार का साथ देखने को मिलेगा। तो बनें रहिए मेरी न्यू स्टोरी हमसफ़र ( उम्र भर जो साथ निभाएं) के साथ......
आपकी अपनी Priti