ये गमे जिंदगी....
Added Successfully to library!
ये गमे जिंदगी....
प्यार
कविता
ये गालिब की ज़मीन और आपकी गहरी सोच का एक खूबसूरत तालमेल है। "गमे-ज़िंदगी" (जीवन का दुख) जब मशवरा मांगने लगे, तो समझो कि इंसान अब थक कर नहीं, बल्कि संभल कर चलना चाहता है।
लेखक : (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
Add To Library
15
Views
5
Ratings
6 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप