यह सफर भी छूट जाएगा...

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यह सफर भी छूट जाएगा...


यह मुसाफिरखाना है दुनिया, यहाँ ठहरता कौन है? जो आज मिला है अपना सा, कल वो रहता कौन है? हवाओं के रुख पर लिखी, यह कहानी बदल जाएगी, पकड़ लो कितनी भी कस के मुट्ठी, यह रेत फिसल जाएगी।

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NAN

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