युवराज नहीं… सम्राट मेरा है

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युवराज नहीं… सम्राट मेरा है


हर कहानी में एक नायिका होती है… और एक भूली हुई साइड कैरेक्टर, जिसे बस दर्द, तिरस्कार और बर्बादी के लिए लिखा जाता है। नायाब रावत भी वही थी। एक ऐसी लड़की— जिसे प्यार में अंधी, जिद्दी और बेवकूफ बताया गया। जिसने एक ऐसे आदमी के लिए अपनी इज्जत तक छोड़ दी… जो कभी उसका था ही नहीं। और आखिर में… उसकी कहानी खत्म हो गई— एक फांसी के फंदे पर। लेकिन… अगर वही कहानी फिर से शुरू हो जाए तो? अगर वही “साइड कैरेक्टर” अपनी किस्मत खुद लिखने का फैसला कर ले तो? 21वीं सदी की एक प्रतिभाशाली लड़की, जिसे जड़ी-बूटियों, दवाइयों और जहर तक का ज्ञान है… जब उसी बेवकूफ नायाब के शरीर में पुनर्जन्म लेती है— तो कहानी वही नहीं रहती। अब वो किसी की रखैल बनने नहीं आई… अब वो खेल पलटने आई है। प्यार? वो अब उसके लिए कमजोरी नहीं। सत्ता? वो अब उसका लक्ष्य है। और इस बार… नायाब रावत किसी की छाया नहीं बनेगी— वो खुद अपनी कहानी की रानी बनेगी।
: Aliza khan

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