नाम गुम हो जायेगा..
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नाम गुम हो जायेगा..
कविता
POEM
यह मुसाफिरखाना है दुनिया, यहाँ ठहरता कौन है? जो आज मिला है अपना सा, कल वो रहता कौन है? हवाओं के रुख पर लिखी, यह कहानी बदल जाएगी,
लेखक : (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
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