चेहरे की किताब: मेरे प्यार की नज़्म
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चेहरे की किताब: मेरे प्यार की नज़्म
प्यार
कविता
तेरे चेहरे की सादगी में वो नूर है, जैसे तपती दोपहर में ठंडी छाँव का अहसास। यह महज़ हाड़-मांस का कोई ढांचा नहीं, बल्कि मेरे लिए कायनात का वो खूबसूरत पन्ना है जिसे मैं उम्र भर पढ़ना चाहता हूँ।
: (ध्रुव तारा )Dr Sanjay Rathod
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