शायद ,यही प्यार है ❤️

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शायद ,यही प्यार है ❤️


सुनो ना… तुम दोनों मिले और बातें शुरू से ही आगे बढ़ने लगीं। देर रात तक घंटों बातें करते हो, तो तुम इसे मोहब्बत समझ लेते हो। लेकिन हो सकता है तुम गलत हो, क्योंकि आजकल अकेलेपन से परेशान दो अजनबी भी बातें कर लेते हैं। और तुम उसके गानों में उसे महसूस करते हो, उसके एहसासों में खुद को शामिल कर लेते हो और इसे प्यार कह देते हो। पर हो सकता है तुम दोनों ही गलत हो, क्योंकि पसंद और प्यार एक जैसे भी लग सकते हैं। और तुम उसकी, और वो तुम्हारी, इंस्टा-फेसबुक स्टोरी का हिस्सा बन जाते हो, तो तुम इसे भी मोहब्बत मान लेते हो। लेकिन हो सकता है तुम गलत हो, क्योंकि मोहब्बत को फ़िल्टर में सेव नहीं किया जाता, उसे बस जिया जाता है। जिस लम्हे में वो इंसान है… हाँ, लेकिन अगर तुम उसके जिस्म की खूबसूरती में उलझने से पहले उसकी रूह में उतरना चाहते हो… अगर वो बेझिझक अपना बचपन तुम्हारे सामने रख देती है… अगर तुम उसके बेवफ़ा होने से पहले अपने सारे राज खोल देते हो… और वो भी अपने सारे डर तुम्हारे सामने रख देती है… अगर उसके हर आँसू तुम्हारी कमीज़ पर गिरते हैं… और तुम्हारी मुस्कान उसकी नादानियत बन जाती है… और तुम दोनों एक-दूसरे से अपने हर डर का ज़िक्र कर पाते हो… तुम उसके पास न होते हुए भी उसकी यादों से प्यार कर बैठते हो… जिसके साथ बिना डरे, बिना शर्त, बस उसके साथ होने से ही सुकून मिलता है… तो शायद… शायद नहीं, यही प्यार है। और ये प्यार मिल जाए, तो उसे थाम लो, संभाल लो और कह दो— “मुझे तुमसे प्यार है… हाँ, मुझे तुमसे प्यार है…” ❤️❤️❤️
: Rekha

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