Poem by Yogesh Sharma
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Poem by Yogesh Sharma
कविता
कविता
Poem केवल सीरीज़ नहीं हैं ये एक किताब हैं पढ़ोगे समझोगे फिर भी अनपढ़ रह जाओगे, मन भटकेगा, लेकिन तुम भटक जाओगे, खुदसे मिलोगे समंदर में बूंद के जैसे, अपने अस्तित्व को खोजो गे, या फिर खुद के अतीत को याद कर फिर खो जाओगे Author: Yogesh Sharma
लेखक : Baba
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