लकह देने का हुनर नहीं मुझमें ,
तू चेहरे से मेरे जज्बात समझ..!
छोड़ भी दे ये नादानियां अब ,
कभी तो मेरी कोई बात समझ..!
दोनों है हम और कोई भी नहीं,
तू ये मौसम और हालात समझ..!
कभी खो जाये हम एक दूजे में,
काश हो ऐसी मुलाकात समझ..!
वो सबके जवाब को देने वाला,
कभी तो मेरे भी सवालात समझ..!
माना मिल गये तुझको सस्ते में,
मगर ना हमको तू खैरात समझ ..!
करे तुझपे जो जान निसार " बेखबर"
तू ऐसे आशिक़ की औकात समझ..!