भैरवपुर गाँव में आधी रात के बाद कोई बाहर नहीं निकलता क्योंकि उस वक्त शिकार शुरू होता है। सन्नाटे से भरी गलियां ठंडी हवा का धीमा स्पर्श और हर बंद दरवाजे के पीछे छिपा अनकहा डर।रात जैसे-जैसे गहराती है, अंधेरा सिर्फ बाहर ही नहीं, अंदर भी उतरने लगता है।कभी दूर से आती हल्की आहट, कभी किसी के होने का एहसास, लेकिन नजर घुमाओ तो कुछ भी नहीं।हर घर में खामोशी है। पर वो खामोशी भी जैसे कुछ कह रही हो।घड़ी की हर टिक-टिक दिल की धड़कन से टकराती है और वक्त जैसे रुक-सा जाता है। यहाँ रात सिर्फ रात नहीं होती ।यह इंतजार होती है, किसी अनजाने पल का, किसी अनदेखे सच का, जिससे हर कोई बचना चाहता है, पर बच नहीं पाता। इस पूरी कहानी को जानने के लिए पढ़ें रात का शिकार सिर्फ लफ़्ज़ों की कहानी पर