कुछ कहना था उसे , जो कह ना पाई
कभी – कभी ना जिसके लिए हम सबकुछ छोड़ने को तैयार हो जाते है , उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ने को तैयार हो जाते है ,,,,
लेकिन अंत में वो ही हमें छोड़ देता उसी दुनिया के लिया ,,
तो मन में कुछ रह जाता है जो उससे हम कह नहीं पाते
बस वहीं लिख देते है ।।।