सपनों की तलाश में देहरादून पहुँचा व्योम, आधी रात के सन्नाटे और घने कोहरे के बीच एक अनजाने डर से घिर जाता है। रास्ते में मिले बिना आँखों वाले बूढ़े और हॉस्टल के रहस्यमयी वॉचमैन की चेतावनियों के बीच, व्योम की हिम्मत तब जवाब दे जाती है जब उसे वॉचमैन के पैर उल्टे नज़र आते हैं। हनुमान चालीसा के पाठ और एक छोटी सी गलतफहमी के दूर होने के बाद वह कमरे में तो पहुँच जाता है, लेकिन असली सस्पेंस अगली सुबह खिड़की खोलने पर शुरू होता है। क्या वह वाकई सुरक्षित था, या यह किसी बड़ी अनहोनी की शुरुआत थी?