वापसी

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वापसी


बारिश की काली रात में, रिया उस घर में लौटती है जिसे वो पीछे छोड़ चुकी थी… या शायद कभी छोड़ ही नहीं पाई। टूटी दीवारें, बंद दरवाज़ा, और आईनों में बदलता सच—हर कोना उसका नाम फुसफुसाता है। कदमों के पीछे कदम, साँसों के बीच किसी और की साँस… जैसे घर ज़िंदा हो। जैसे-जैसे परतें खुलती हैं, यादें टूटती हैं और हकीकत मुड़ने लगती है। और फिर सच सामने आता है—रिया यहाँ मेहमान नहीं… कैद है। और जिस साये से वो डरती है… वो अंधेरा उसी के भीतर पल रहा है।

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