महाराष्ट्र के जालना जिले में एक छोटा सा सुंदर गाँव था — एकलहरा। यह गाँव अपने आप में बहुत ही शांत, खुशहाल और प्रसन्न माना जाता था। गाँव के लोग सरल और मेहनती थे। हर घर में संतोष था, इसलिए वहाँ झगड़े बहुत कम होते थे।
गाँव के किनारे से एक शांत नदी बहती थी। उसी नदी के किनारे एक बहुत पुराना और विशाल बरगद का पेड़ खड़ा था। वह पेड़ इतना बड़ा था कि उसकी जड़ें और शाखाएँ दूर-दूर तक फैली हुई थीं। गाँव के बुजुर्ग कहते थे कि यह पेड़ सैकड़ों साल पुराना है।
उस पेड़ के मोटे तने में एक 4–5 टन का बड़ा पत्थर गड़ा हुआ था। यह दृश्य बहुत अजीब लगता था, इसलिए गाँव के लोग उसे रहस्यमय मानते थे। कई लोग कहते थे कि उस पुराने पेड़ के नीचे गुप्त धन छिपा हुआ है।
लेकिन उस गुप्त धन की रक्षा करता था एक विशालकाय नाग। गाँव में यह भी माना जाता था कि जो भी उस धन को लेने की कोशिश करेगा, उसे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
उसी गाँव में एक गरीब परिवार रहता था। उस परिवार में माता-पिता और उनके दो बेटे थे। परिवार बहुत गरीब था, लेकिन मेहनती था। वे लोग खेतों में काम करके किसी तरह अपना पेट भरते थे।
एक दिन गाँव के पुराने मंदिर की सफाई हो रही थी। सफाई करते समय मंदिर की दीवार के पीछे से एक पुराना ग्रंथ मिला। वह ग्रंथ गाँव का बहुत पुराना इतिहास बताने वाला था। जब गाँव के लोगों ने उसे पढ़ा, तो उसमें उस गुप्त धन का जिक्र भी मिला।
ग्रंथ में लिखा था कि नदी के किनारे पुराने बरगद के नीचे अपार धन छिपा हुआ है। लेकिन उसके साथ एक भयानक श्राप भी जुड़ा हुआ है।
जब उस गरीब परिवार ने यह बात सुनी, तो उनके मन में आशा जागी। उन्हें लगा कि अगर उन्हें वह गुप्त धन मिल जाए, तो उनकी गरीबी हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।
कई दिनों तक सोचने के बाद एक रात वह परिवार चुपचाप गुप्त धन की खोज में निकल पड़ा।
रात का समय था। चारों ओर सन्नाटा था। जब वे नदी के किनारे पहुँचे, तो उन्हें दूर से वही पुराना और भयानक बरगद का पेड़ दिखाई दिया। उसकी लटकती हुई जटाएँ हवा में हिल रही थीं और वातावरण बहुत डरावना लग रहा था।
लेकिन लालच ने उनके डर को कम कर दिया।
परिवार ने धीरे-धीरे उस पेड़ के नीचे खुदाई शुरू कर दी।
कुछ देर बाद उन्हें जमीन के अंदर बड़ी-बड़ी सुरंगें दिखाई देने लगीं। यह देखकर वे हैरान हो गए। ऐसा लग रहा था जैसे जमीन के नीचे कोई विशाल संसार छिपा हुआ हो।
जब वे आगे बढ़े, तो उन्हें वहाँ एक विशालकाय साँप की केंचुली मिली। वह केंचुली इतनी बड़ी थी कि उसे देखकर ही डर लगने लगा।
परिवार के सभी लोग बहुत डर गए। उन्हें समझ में आ गया कि यहाँ सच में कोई बहुत बड़ा नाग रहता है।
तभी अचानक सुरंग के अंधेरे में से एक विशालकाय नाग बाहर आया। उसकी आँखें चमक रही थीं और उसका फन बहुत बड़ा था।
परिवार डर के मारे कांपने लगा।
लेकिन आश्चर्य की बात यह हुई कि नाग ने उन पर हमला नहीं किया। वह शांत स्वर में बोला—
“मुझे पता है कि तुम लोग गुप्त धन लेने आए हो।”
परिवार घबरा गया, लेकिन फिर पिता ने साहस करके पूछा—
“हमें वह धन चाहिए ताकि हमारी गरीबी खत्म हो सके।”
नाग कुछ देर तक सोचता रहा। फिर उसने कहा—
“मैं तुम्हें वह धन दे सकता हूँ… लेकिन एक शर्त पर।”
परिवार ने तुरंत पूछा, “कौन सी शर्त?”
नाग बोला—
“तुम्हें अपने परिवार में से एक बेटे को मुझे देना होगा।”
यह सुनकर परिवार स्तब्ध रह गया। लेकिन गुप्त धन का लालच बहुत बड़ा था।
कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने नाग से समझौता कर लिया।
उसी समय उन्हें ग्रंथ में लिखा हुआ श्राप याद आया, लेकिन लालच के कारण उन्होंने उस श्राप को पूरी तरह भुला दिया।
आखिरकार उन्होंने अपने बड़े बेटे को नाग को देने का निर्णय लिया।
नाग ने अपनी बात निभाई। उसने उन्हें जमीन के अंदर छिपा हुआ गुप्त धन दिखा दिया।
वहाँ सोने-चांदी के सिक्के, हीरे-जवाहरात और अनगिनत खजाने भरे हुए थे।
इतना धन देखकर परिवार की आँखें चमक उठीं।
उन्होंने नाग को अपना बड़ा बेटा दे दिया और सारा गुप्त धन लेकर गाँव लौट आए।
कुछ ही समय में वह गरीब परिवार बहुत अमीर बन गया। उनके पास बड़े-बड़े घर, खेत और नौकर-चाकर हो गए।
गाँव के लोग उनकी अचानक आई अमीरी देखकर हैरान थे।
लेकिन धीरे-धीरे वह भयानक श्राप सच होने लगा।
समय बीतता गया और उस परिवार की आने वाली पीढ़ियाँ पैदा होने लगीं।
लेकिन हर पीढ़ी के बच्चे मानसिक रूप से कमजोर पैदा होने लगे।
वे न तो ठीक से कुछ समझ पाते थे, और न ही उस धन का सही उपयोग कर पाते थे।
परिवार के पास अपार संपत्ति थी, लेकिन उसे खर्च करने या संभालने की समझ किसी में नहीं थी।
धीरे-धीरे वह धन भी बेकार होता चला गया।
तब लोगों को एहसास हुआ कि लालच में किया गया समझौता हमेशा विनाश की ओर ले जाता है।
एकलहरा गाँव के लोग आज भी उस पुराने बरगद के पेड़ की ओर देखकर कहते हैं—
“कुछ खजाने ऐसे होते हैं जिन्हें पाना ही सबसे बड़ा दुर्भाग्य बन जाता है।