खुद को ढूँढता मैं
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खुद को ढूँढता मैं
मेरी डायरी
कविता
खुद को पाना असल में खुद को बनाने की प्रक्रिया है। हम कहीं खोए नहीं हैं, बस वक्त की धूल के नीचे थोड़े छुपे हुए हैं।
लेखक : अज्ञात
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