तीन वर्ष पहले नैरा ने अपना सब कुछ खो दिया था —
उसका प्रेम, आरव, जो सीमा पर शहीद हो गया था।
समय ने जैसे-तैसे उसके ज़ख्मों पर मरहम लगाना शुरू ही किया था कि एक रात अचानक उसके फ़ोन पर एक अनजान नंबर से संदेश आया—
“मैं वापस आऊँगा… बस इंतज़ार करना।”
संदेश के अंत में लिखा नाम था — आरव।
नैरा के हाथ काँप उठे।
क्या कोई शहीद सचमुच लौट सकता है?
या यह किसी भयानक साज़िश की शुरुआत है?
अब हर रात एक नया संदेश आता है…
हर दिन एक नया रहस्य सामने आता है…
और नैरा का दिल सच और डर के बीच झूलता रहता है।
यह कहानी सिर्फ़ प्रेम की नहीं है—
यह कहानी है इंतज़ार की, रहस्यों की,
और उस सच की
जो कभी दफ़्न नहीं होता।