प्यार बनाम वाईफाई

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प्यार बनाम वाईफाई


आज का समय रिश्तों के लिए सबसे तेज़ और सबसे असमंजस भरा दौर है। एक क्लिक, एक मैसेज, एक वीडियो कॉल… और अनजान चेहरे भी अपने लगने लगते हैं। दिल इतनी जल्दी जुड़ जाता है कि दिमाग पीछे छूट जाता है। फिर जब वो जुड़ाव टूटता है, तो दर्द ऐसा होता है जैसे ज़िंदगी ही रुक गई हो। इसी दौर में, जहाँ वाई-फाई की रफ्तार से प्यार पनप रहा है, वहीं रिश्तों की सच्चाई फ्रिज, ड्रम, सूटकेस और कटर जैसी सुर्खियों में हम सबको झकझोर रही है। यह विरोधाभास हमें सोचने पर मजबूर करता है। क्या आज हम प्रेम को समझ रहे हैं, या बस अपनी भावनात्मक कमी को किसी नाम से पुकार रहे हैं? आजकल के लड़के लड़की बोलते नजर आ रहे हैं उसको भूल नहीं पा रहे, उसके बिना कुछ अच्छा नहीं लग रहा तो यह लेख उसी उलझन, उसी भ्रम और उसी सच्चाई की परतें खोलने का प्रयास है। ताकि युवा दिल यह समझ सकें कि प्यार सिर्फ महसूस करने का नाम नहीं, खुद को मजबूत बनाने और सही को चुनने की समझ का भी नाम है। हम यह नहीं कहते कि ऑनलाइन प्यार झूठा होता है, लेकिन यह ज़रूर कहते हैं कि भावनाओं में बहकर खुद को खो देना समझदारी नहीं है। अकेलापन अक्सर प्यार का नाम ओढ़ लेता है, अटैचमेंट को हम सच्चा रिश्ता मान बैठते हैं, और थोड़े से ध्यान को हम जीवन का सहारा समझ लेते हैं। सच्चा प्रेम वो है जो आपको मजबूत बनाए, आपकी पहचान को निखारे, आपके सपनों के साथ खड़ा हो। जो रिश्ता आपको खुद से तोड़ दे, जो आपको इतना कमज़ोर कर दे कि आप अपनी ज़िंदगी की डोर किसी एक इंसान के हाथ में सौंप दें, वो प्रेम नहीं, निर्भरता है। हमारी तरफ से बस यही कहना है पहले खुद से प्रेम करना सीखिए।खुद को इतना मजबूत बनाइए कि कोई आए तो आपकी ज़िंदगी में खुशियाँ जोड़ने आए, आपकी पूरी ज़िंदगी बनने नहीं। क्योंकि जो दिल आत्मसम्मान से जुड़ा होता है, वो वाई-फाई की तरह कमजोर सिग्नल पर टूटता नहीं, बल्कि हर तूफ़ान में भी स्थिर खड़ा रहता है। आगे भी इसी तरह की रचना पढ़ना चाहते हैं तो कमेंट में बताएं तब तक स्वस्थ रहिए मस्त रहिए 👍 विश...
: Vishu

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