बेकरारी

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बेकरारी


यह कविता एक टूटे हुए मन की पुकार से शुरू होकर उम्मीद, अपनापन और जीवन के प्रति समर्पण तक पहुँचती है। यह रिश्तों, संवेदना और इंसानियत की अहमियत को शब्दों में पिरोती है।
लेखक : King

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