नगमों में समेट लोगे ...?
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नगमों में समेट लोगे ...?
कविता
नगमा सुना है आज अपने ही फसाने का कि थोड़ा जी के जाने का तो थोड़ा मर के जाने का ...!!
लेखक : Nayii Kalam
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