मेरी जान जरा खुद को पहचान,
क्यों है तू खुद से अजान,
सबको देखना ही बस तेरा ही है काम,
अब दे दे कुछ खुद को ज्ञान,
मेरी जान मेरी जान ज़रा खुद को पहचान।।
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ध्यान तुझे खुद का आता नही,
तेरा तुझे खुद का कुछ भाता नहीं है।
औरों का क्यों रखे तू ध्यान
मेरी जान मेरी जान।।
प्यार तू सबको देती है,
चाहतों में रहती है, मगर फिर भी
सब है तुझ से अंजान ,
मेरी जान मेरी जान ।।
देख तू करती जो जाएगी,
गर तू न कुछ पाएगी
तो होगा तनहा रहना ही अंजाम,
मेरी जान मेरी जान ।।
ज़रा खुद को पहचान।।