रात का वो तन्हा सुकून
Added Successfully to library!
रात का वो तन्हा सुकून
कविता
कविता
वह सुकून जो शोर-शराबे और दिन की भागदौड़ में कहीं खो जाता है, वह रात के सन्नाटे में ही खिलता है। यह रात का अंधेरा डराने वाला नहीं, बल्कि खुद से मिलने वाला एक जरिया बन जाता है।
: Simple Human
Add To Library
10
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप