रुकने की इच्छा- Jîज्ञासा
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रुकने की इच्छा- Jîज्ञासा
मेरी डायरी
कविता
कुछ लोग जाते हुए भी रुकने की उम्मीद छोड़ जाते हैं। यह कविता उसी मनःस्थिति पर आधारित है जहाँ शब्द जाने के होते हैं, पर मन अब भी ठहरना चाहता है। यह एक डायरी का पन्ना है, जो शायद आपने भी कभी जिया हो।
लेखक : Jîज्ञासा
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