भूखी छाया
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भूखी छाया
दैनिक प्रतियोगिता
छोटी कहानियां
एक वीरान गाँव, एक बंद कुआँ और एक भूखी परछाईं—जो रात में नाम लेकर बुलाती है। जिसने पलटकर देखा, उसकी कहानी वहीं खत्म नहीं होती… वहीं से शुरू होती है।
लेखक : विजय सांगा
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