काव्या सिर्फ अपनी कज़िन माया की शादी में कोलकाता से आई थी उसे नहीं पता था कि उसी शादी में उसकी किस्मत करवट लेने वाली है। अचानक घर वाले उसी से शादी की बात करने लगते हैं।
काव्या हैरान—“मेरे साथ ही क्यों?”माहौल में अजीब सी जल्दबाज़ी और छुपी हुई बेचैनी थी।और फिर… सबसे बड़ा झटका, जब माया खुद उसे शादी के लिए तैयार करती है।
माया की आँखों में डर था, लेकिन होंठों पर मजबूर मुस्कान। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा राज़ दबा हुआ है। काव्या हाँ कहती है… और उसी पल उसकी जिंदगी एक अनजाने रास्ते पर मुड़ जाती है। यही है नसीब की चाल—जहाँ एक पल में सब बदल जाता है।