नमस्कार प्रबुद्ध जनों ,
व्यभिचारिणी उपन्यास पूर्णरूपेण काल्पनिक है। किसी भी पात्र का नाम या उसका किरदार कहानी के किसी भी पात्र से मिलता है तो यह एक संयोग मात्र ही है। इस उपन्यास को लिखने का उद्देश्य समाज में व्याप्त बुराइयों पर प्रकाश डालना है। किसी भी व्यक्ति ,जाति या धर्म को ठेस पहुंचाना मेरा मकसद नहीं है। आप इसे मनोरंजन की तरह ही स्वीकार करें और अपना स्नेह ,आशीर्वाद बनाएं रखें।
'धन्यवाद"