ख्वाहिशें अनकही सी

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ख्वाहिशें अनकही सी


शहर की चमकती रौशनियों के बीच कुछ ख़्वाब ऐसे भी होते हैं जो दिल की तहों में चुपचाप सिमटे रहते हैं। न कोई फ़रियाद, न कोई शोर—बस एक मुलायम-सी उम्मीद, कि शायद किसी दिन कोई उन्हें बिना कहे भी समझ ले…कहानी की शुरुआत वहीं से होती है, जहाँ दो अनकही ख़्वाहिशें पहली बार एक-दूसरे की निगाहों में अपनी मंज़िल ढूँढ़ने लगती हैं।
: Zoyu

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