Mohabbat-e-Fasana… एक ऐसी दास्तान, जिसका अगला मोड़ खुद किस्मत ने भी छुपा दिया।
रघुवीर सिंगानिया, इक्षिता रायचंद को पहली ही नज़र में दिल दे बैठता है—
वो नज़र, जो उसके दिल में उतरकर वहीं ठहर जाती है।
धीरे-धीरे इक्षिता भी उसी मोहब्बत में पिघलने लगती है…
दोनों एक-दूसरे की दुनिया, एक-दूसरे की खामोश धड़कन बन जाते हैं।
लेकिन… एक सुबह सब बदल जाता है।
रघुवीर अचानक गायब हो जाता है—
बिना कोई निशान, बिना कोई अलविदा।
इक्षिता की मोहब्बत एक रहस्य बन जाती है…
और रघुवीर की खामोशी एक ऐसा राज़,
जो शायद उनकी कहानी को मुकम्मल करेगा—
या फिर तोड़ देगा।”