जन्म एक सैनिक किसान का बेटा…
एक सपना जो बचपन से धड़कनों में बसा था…
और एक रास्ता जो मुश्किलों से भरा था।
हज़ारों की भीड़ में, पसीने और संघर्ष के बीच,
वह लड़का हर कदम पर सिर्फ एक बात साबित करता गया
हिम्मत किसी किताब से नहीं, दिल से निकलती है।
दौड़, दर्द, ट्रेनिंग, गिरना
सब कुछ पीछे छोड़कर वह उठा, फिर दौड़ा…
क्योंकि उसका सपना सिर्फ उसका नहीं था
पूरे देश का था।
और जब चयन सूची में उसका नाम चमका,
उसी पल एक नया अध्याय शुरू हुआ।
आज वह सिर्फ आरव नहीं…
देश की ढाल है।
यह कहानी है एक ऐसे लड़के की,
जिसने अपने सपने नहीं चुने
सपनों ने उसे सैनिक बनने के लिए चुना। by सुनीता गुप्ता