नाम के रिश्ते
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नाम के रिश्ते
दैनिक प्रतियोगिता
कविता सीरीज
ये कविता आज कल के रिश्तों की सच्चाई को दर्शाती है, लोग अपनों को छोड़ कैसे गैरों पर भरोसा करते है, रिश्त बस नाम के ही रह गए है
लेखक : dil_seee_shayriii
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