The Ultimate Worrier

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The Ultimate Worrier


धरातल साम्राज्य की नींव उतनी ही प्राचीन थी, जितने पुराने इसके नीचे धड़कते रहस्यमयी ऊर्जा स्रोत। वही ऊर्जा जिसे लोकों में "धरा शक्ति” कहा जाता था। सिर्फ चुनिंदा योद्धाओं को दी जाती थी। रघुवंश दल, जो साम्राज्य का सबसे प्राचीन और युद्धकला में सर्वश्रेष्ठ दल माना जाता था, इस शक्ति का सबसे पवित्र रक्षक माना जाता था। उसी रघुवंश दल में जन्मा था अर्जुन रघुवंशी, अमर रघुवंशी और जानवी रघुवंशी का बेटा एक ऐसा बालक जिसके बारे में कहा जाता था कि वह धरा शक्ति को सुन भी सकता है। मात्र 10 वर्ष की आयु में उसने रघुवंश दल की शक्तियों का वह स्तर छू लिया था जो सो वर्षो से सिर्फ वृद्ध योद्धाओं ने हासिल किया था। गुरु देवर्षि देव, जो धरातल साम्राज्य के सबसे बड़े दिव्य गुरु माने जाते थे, यह घोषित करते हुए भी कांप गए थे कि अर्जुन ने "एकलव्य चेतन” शक्ति को जागृत कर लिया है। एक ऐसी क्षमता जो किसी भी योद्धा को अपने भीतर की सात चक्र से संवाद करने देती है। लेकिन किस्मत का पहिया कभी रुकता नहीं। एक ब्रह्म मंडल युद्ध प्रैक्टिस के दौरान, अर्जुन की चक्र में एक अनजानी परछाई घुस गई। एक ऐसी छाया, जिसे पूरे साम्राज्य में “अस्त शाप” के नाम से जाना जाता था। इस शाप ने उसकी सारी साधी हुई शक्ति को पलक झपकते ही नष्ट कर दिया। वह, जो इतिहास का सबसे कम उम्र में “एकलव्य” योद्धा बना था, अब धरातल साम्राज्य में शक्ति सीढ़ी के सबसे नीचे, यानी “शून्य” स्तर पर गिर चुका था। अमर रघुवंशी, जो दल में शौर्य और नीति के स्तंभ माने जाते थे, का सिर झुक गया। जानवी, जो धराशक्ति के स्वभाव को समझने वाली खास योद्धा में से थीं, अपने बेटे का दर्द देख निस्सहाय हो गईं। गुरु देवर्षि देव ने हर उपाय दिव्य साधना से लेकर मानसिक युद्धकला तक आजमाए, पर अर्जुन की चक्र जैसे किसी बिन देखे कैद में थीं। समय बीतता गया। अर्जुन ने वर्षों तक प्रैक्टिस की। अस्त शाप से लड़ने की कोशिश में उसने अपने शरीर से अधिक अपनी आत्मा को घिसा। लेकिन वह उस ऊँचाई तक दोबारा कभी नहीं पहुँच पाया। पूरे धरातल साम्राज्य में लोग फुसफुसाने लगे, “वह बच्चा जिसने चमत्कार किया था। अब सिर्फ एक कहानी बचेगा।” तभी रघुवंश दल ने उसे अंतिम परीक्षा के लिए चुन लिया। अमर अग्नि चुनौती। यह वह परीक्षा थी जिसमें योद्धा को धरा शक्ति की मूल अग्नि से संवाद करना होता था। यदि वह सफल हुआ तो वह अपने खोए हुए भाग्य का फिर से जगाएगा। यदि वह असफल हुआ। तो धरातल साम्राज्य में उसका अस्तित्व, उसकी वंश इज़्ज़त, और उसका दल सब धूल हो जाते। गलतियों की कोई गुंजाइश नहीं थी। साम्राज्य के बुज़ुर्गों ने स्पष्ट घोषणा कर दी। अगर अर्जुन असफल हुआ, तो रघुवंश दल को न सिर्फ उसके कारण शर्म झेलनी पड़ेगी, बल्कि उसे दल से निकाल कर उसकी धरा शक्ति हमेशा के लिए सील कर दी जाएगी। अब अर्जुन के सामने दो रास्ते थे। एक, अपने टूटे हुए अतीत में दबकर मिट जाना। या फिर खुद को नहीं, बल्कि अपनी नियति को जीत लेना। और इस तरह शुरू होता है The Ultimate Worrier का सफ़र जहाँ युद्ध हथियारों से नहीं, आत्मा की सात चक्र चेतनाओं से लड़ा जाता है। क्या अर्जुन बनेगा एक Ultimate Super Worrier ये जानने के लिए पढ़ते रहिए। हमारी कहानी "The Ultimate Worrier" सिर्फ और सिर्फ लफ्जो की कहानी पर।

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