ऐ दिल जी ले जरा

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ऐ दिल जी ले जरा


मै पाखी हूं ये किसी और की नहीं बल्कि मेरी मां की कहानी है , जहां से शुरू हुई मेरी भी कहानी  , मेरी और अग्रिम की नफरत भरी कहानी ...  उसने न सिर्फ मेरे सपनों को तोड़ा , साथ ही साथ मुझे भी बर्बाद कर दिया , उसकी नफरत की आग में जल कर राख हो गए मेरे वजूद , मेरा सब कुछ छीन लिया उसने ... बदले की आग में .... । मुन्नीबाई का कोठा ( कोलकाता ) " छोड़ दो मुझे जाने दो , मैं वैसी लड़की नहीं हूं , मुझे यहां धोखे से लाया गया है प्लीज मुझे जाने दो , मुझे यहां नहीं रहना है जाने दो रॉबी  प्लीज एक बार मेरी बात सुनो , मै तुम्हारी पत्नी हूं , रॉबी ।" एक लड़की लगभग 23 साल की होगी , दुल्हन की तरह सजी हुई थी , चेहरे की सुंदरता ऐसी की जो भी देखे वो मोहित हो जाए , लाल रंग की साड़ी, गहनों से सजी हुई , लेकिन आज उसकी किस्मत पूरी तरह से बदलने वाली थी , उस  प्रेग्नेंट औरत को आज उसके पति ने ही  बेच दिया , मुन्नीबाई के कोठे पर , वो चीख रही थीं , दहाड़े मारकर रोए जा रही थी कि उसे कुछ नहीं चाहिए बस उसे इस दलदल में छोड़ कर ना जाए , उसके लिए न सही लेकिन एक बार अपने आने वाले बच्चे के बारे में सोचे लेकिन उसका रोना उसके पति ने सुना ही नहीं वो एक बार उसे वहां छोड़कर गया फिर मुड़कर नहीं देखा । एक 45 साल की औरत जो दिखने में गोरी सी , बैकलेस ब्लाउज और चमचमाती हुई सिल्क सिल्क की साड़ी पहने हुए , होठों पर चटक लाल रंग की लिपस्टिक , बालों में गजरा , आंखे बड़ी - बड़ी   और माथे पर चमक रही बिंदी , मुंह में पान दबाएं हुए बस घूर कर गुस्से से उस लड़की की तरफ देखे जा रही थी , बगल में रखें हुए बर्तन में पान की पीक को थूकते हुए बोली , " क्या रे छोकरी , अपुन तेरा रोना - धोना सुनली नहीं बैठी रे , ये आंसू देखकर अपुन नहीं पिघलने वाली है , कीमत चुकाई है तेरे मर्द को अपुन ने पूरे 2 लाख दिया है इसलिए नहीं कि तेरा रोना - धोना सुनती रही अपुन , तू पेट से है इसी लिए तेरे से अभी धंधा नहीं कराएगी अपुन इसके बाद तो तेरे को यहीच धंधा करना मांगती हैं , बस हो गया वैसे तेरे को पता है आज से पहले भी तेरा मरद इधरीच कितनी औरतों को बेच चुका है , तू पहली नहीं है रे , वो इधरीच धंधा करने वाली के साथ सोने आता है और न जाने कितनों को धंधे पर लगा चुका है , अपुन बोले तो दलाल है तेरा मरद और तू उसकी कोई घरवाली नहीच है बस दिल बहलाने का खिलौना थी जिससे अब उसका दिल भर गेला अब उसको तेरे से कोई मतलबइच नहीं है रे , वैसे तेरा नाम क्या है रे।" वो लड़की कुछ नहीं बोली बस दीवार लग कर खड़ी हो गई पत्थर की मूरत बनकर , जैसे उसके आंसू सुख गए हो , दिल में उस शख्स के लिए बेशुमार नफरत भरे, वो उस दिन को कोस रही थी जब उसने इसी शख्स के प्यार में अंधी होकर अपने ही घरवालों से बगावत किया और अंजाम क्या हुआ , सर से छत छीन गया , मां - बाप का प्यार , नाम - पहचान और अब इज्जत भी इस कोठे पर आकर नीलाम हो गई , आखिर उस शख्स ने धोखा दे डाला जिस पर वो सबसे ज्यादा भरोसा करती थी , भरोसे के बदले हमेशा धोखा ही मिला है ये तो दुनिया का दस्तूर है । रेड लाइट एरिया की पाखी के सपनों को पूरा करने के लिए अग्रिम करेगा सारे हदों को पार लेकिन क्या होगा जब उसके सामने आएगी पाखी की सच्चाई .... क्या वो अपने वसूलों की बेड़ियों को तोड़कर पाखी के सपनों को पूरा कर पाएगा , पढ़िए प्यार की अनोखी दास्तां " ऐ दिल जी ले जरा " सिर्फ "लफ्जों की कहानी" पर - महिमा बरनवाल
: Mahima

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