मोहब्बत अजीब होती है। शुरू में दिल में फूल खिलाती है,और अंत में उसी दिल को मुरझा देती है। मोहब्बत पहले हँसाती है… फिर रुलाना सिखाती है। पहले आपको किसी का प्यारा बना देती है…फिर उसी की याद में रातों को जागना पड़ता है।मोहब्बत एक नशा है। धीरे-धीरे चढ़ती है,और अचानक उतार देती है,ऐसे उतारती है कि इंसान खुद को पहचान नहीं पाता। कभी मोहब्बत जन्नत लगती है… तो कभी वही मोहब्बत बर्बाद कर देती है।
दिल को इतनी आवाज़ से तोड़ती है कि
टूटने की आवाज़ बाहर नहीं आती,
सिर्फ भीतर गूँजती रहती है।
यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है,
"बेरूह जिंदगी "