टूटी उम्मीदें
Added Successfully to library!
टूटी उम्मीदें
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
जब भी तेरी याद आती है मैं रो देती हूं, तेरी यादों में बैचेन होकर हर अंधेरी रात मैं खुद को खो देती हूं। सुनना है अगर मेरी दर्द को वो कहानी , मिलों मेरे उपधानम् ( संस्कृत शब्द) से बता देगा वो पूरा मुंह जुबानी।
: Jyoti kumari
Add To Library
10
Views
5
Ratings
2 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप