दीपक की रोशनी
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दीपक की रोशनी
कविता
कविता
जलाओ दीप को, दहलीज पर अपनी, ताकि कोई राही न भटके राहों में। ये जीवन है, इसे रोशन करते चलो, जैसे दीपक जलता है सदा चाहों में।
: Simple Human
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