भस्म हो रही हूँ मैं
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भस्म हो रही हूँ मैं
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
यह कविता एक लड़की के दर्द, जज्बात को व्यक्त करती है, वो कैसे खामोश रहती है अपनी तकलीफों को किसी से भी नहीं कहती है।
लेखक : dil_seee_shayriii
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